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AMU छात्रसंघ चुनाव पर बोले पूर्व सचिव शाहज़ेब अहमद आशु—अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना विश्वविद्यालय की पहचान:
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेताओं और छात्रों में खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है। छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर लगातार 18 दिनों तक चले धरने और आंदोलन के बाद चुनाव की घोषणा को छात्र राजनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसी क्रम में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वर्ष 2014-2015 में छात्रसंघ सचिव पद पर सर्वाधिक वोटों से जीत हासिल करने वाले पूर्व छात्रसंघ सचिव शाहज़ेब अहमद आशु ने भी खुशी जाहिर की है। उन्होंने प्रेस वार्ता कर छात्रसंघ चुनाव की घोषणा का स्वागत किया और कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का इतिहास हमेशा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का रहा है। जब भी कहीं जुल्म होता है, तो एएमयू के छात्र-छात्राएं उसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सामने आते हैं।
शाहज़ेब अहमद आशु ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केवल अलीगढ़ या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि देश और विदेश में भी इस विश्वविद्यालय की पहचान शिक्षा, सामाजिक चेतना और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले संस्थान के रूप में रही है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग के साथ अन्याय होने की बात सामने आती है, तो एएमयू के छात्र-छात्राओं ने समय-समय पर अपनी भूमिका निभाई है। उनके मुताबिक, इस बार भी छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर शुरू हुआ आंदोलन इसी परंपरा का हिस्सा है।
पूर्व छात्रसंघ सचिव ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर छात्रों ने लगातार 18 दिनों तक धरना दिया। इस दौरान आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि एएमयू के छात्रों का यह आंदोलन गांधीवादी तरीके से आगे बढ़ा और प्रदर्शनकारियों ने किसी को नुकसान पहुंचाने के बजाय अपनी मांगों को सामने रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार, इतने लंबे समय तक धरना चलने के बावजूद आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखना छात्रों की एक बड़ी जिम्मेदारी थी, जिसे उन्होंने निभाने का प्रयास किया।
शाहज़ेब अहमद आशु ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्रों की मांग को शुरुआत में जिस तरह समझा जाना चाहिए था, उस तरह नहीं समझा गया। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून तक भी शुरुआत में छात्रों की बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग कुलपति को पूरे मामले की सही जानकारी नहीं दे रहे थे, जिसके कारण छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच संवाद की स्थिति प्रभावित हुई।
उन्होंने कहा कि बाद में जब छात्र सीधे कुलपति से मिले और अपनी बात उनके सामने रखी, तब उन्हें छात्रों की मांगों और उनकी भावनाओं को समझने का अवसर मिला। शाहज़ेब अहमद आशु के मुताबिक, छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन का विरोधी या दुश्मन मानने के बजाय उनकी बात सुनने की जरूरत थी। उन्होंने कहा कि छात्र भी इसी विश्वविद्यालय का हिस्सा हैं और विश्वविद्यालय की बेहतरी चाहते हैं। ऐसे में छात्रों की मांगों को केवल विरोध के रूप में देखने के बजाय उन्हें संवाद और समाधान के नजरिए से समझना चाहिए।
पूर्व छात्रसंघ सचिव ने कहा कि छात्र और विश्वविद्यालय प्रशासन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि संस्थान की बेहतरी के लिए साथ काम करने वाले पक्ष हैं। यदि छात्रों को अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलता है और प्रशासन उनकी बातों को गंभीरता से सुनता है, तो कई विवाद बातचीत के माध्यम से सुलझाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रसंघ का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना या पद हासिल करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंचाना और उनके समाधान के लिए प्रयास करना भी है।
शाहज़ेब अहमद आशु ने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि जब जमीरुद्दीन शाह विश्वविद्यालय के कुलपति थे, उस समय विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया था। उन्होंने कहा कि उस दौरान भी छात्रों ने अपनी बात रखी थी और विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी भूमिका निभाई थी। उनके अनुसार, एएमयू के छात्र समय-समय पर संस्थान से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे हैं और विश्वविद्यालय की बेहतरी के लिए आवाज उठाते रहे हैं।
10/09/2026 02:53 PM


















