Aligarh
निजी नर्सिंग होम में युवक की मौत, परिजनों ने किया हंगामा: जिन अस्पतालों के संचालक नहीं है पेशेवर डॉक्टर वहां बिगड़ते हैं ज्यादा मामले।
अलीगढ़। ऑपरेशन में लापरवाही बरतने पर भले ही आगरा के डॉक्टर के पी सिंह को 10 साल एवं ₹20000 जुर्माने की सजा हुई हो, फिर भी अलीगढ़ में आए दिन नर्सिंग होम, अस्पतालों में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आ रही, उनमें खास वजह यह निकल कर आ रही है कि अस्पताल संचालक पेशेवर डॉक्टर नहीं है बल्कि व्यापारी है जो केवल मरीज के ऊपर निर्धारित धनराशि वसूलने का कार्य कर रहे हैं कई अस्पतालों में देखने को मिला है कि परिजनों द्वारा मरीज के पैसे कम देने पर उन्हें अस्पताल के संचालकों द्वारा पीटा तक गया है ऐसे लापरवाह अस्पतालों पर न तो प्रशासन ध्यान दें रहा और न ही सरकार। सूत्रों के मुताबिक अलीगढ़ में कई ऐसे संचालकों द्वारा संचालित अस्पताल जिनमें केवल व्यापार किया जा रहा है और वह मरीज के शरीर पर प्रयोग करते हुए उसकी बचाए जाने वाली जिंदगी को मौत के घाट उतार देते हैं। जांच का विषय यह भी है कि मेडिकल रोड पर एंबुलेंस चालक कौन है जो चला रहे अस्पताल?
आपको बता दें कि दरअसल मामला थाना महुआ खेड़ा क्षेत्र में स्थित एक निजी नर्सिंग होम का है। जहां एक युवक कि मौत होने पर परिजनों अधिक पैसे न देने पर डाॅक्टरों पर गलत इंजेक्शन लगाकर मारने का आरोप लगाया और हंगामा किया। सूचना पर पहुंची इलाका पुलिस ने हंगामा कर रहे परिजनों को समझा बुझाकर शांत किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। युवक के परिजनों ने नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। ओमवीर सिंह पुत्र खचेर सिंह निवासी मऊपुर गंगीरी ने बताया कि उनके 23 वर्षीय भाई हरवीर ने किसी बात को लेकर गले में फंदा लगाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया था। परिजनों ने उसे फंदे से उतारकर एक निजी होम में भर्ती कराया। यहां नर्सिंग होम संचालक ने उनसे इलाज के नाम पर लाखों रूपए ऐंठ लिए। नर्सिंग होम संचालक ने उनसे और पैसों की मांग की पैसे न देने पर गलत तरीके का इंजेक्शन लगाकर उसकी जान ले ली। नर्सिंग होम में हुई युवक की मौत गांव में आग की तरह फैला गई और तमाम ग्रामीण और परिजन, नर्सिंग होम पर हंगामा करने लगे। हंगामा देखते ही नर्सिंग होम स्टाफ तुरंत फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया और कार्रवाई का भरोसा दिया। महुआ खेड़ा इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने बताया कि परिवार की ओर से तहरीर दी गई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
अलीगढ़ में अस्पतालों में हुई मौत पर विवाद के कुछ मामले
केस-1 बीते दिनों नादा पुल पर गली में बने अस्पताल में भी ऐसा ही मामला अलीगढ़ जिले के थाना रोरावर इलाके के अस्पताल में देर रात डॉक्टर व स्टाफ की लापरवाही के कारण प्रसूता की मौत हो गई. जबकि अस्पताल में जन्म लेने वाला नवजात पूरी तरह स्वस्थ है. महिला की मौत के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गईय मृत महिला के परिजनों ने बिना बताए महिला का ऑपरेशन करने का डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया. इस दौरान कर्मचारी और डॉक्टर अस्पताल में ताला बंदकर भाग गए।
केस-2 गांधीपार्क क्षेत्र के नौरंगाबाद इलाके में स्थित निजी अस्पताल में भर्ती जच्चा व बच्चा की मौत होने के बाद जमकर बवाल हुआ था और परिवार को प्रशासन ने आश्वस्त किया था कि कार्यवाही की जाएगी परंतु आज तक कार्यवाही दिखाई नहीं दी।
केस-3 तहसील खैर क्षेत्र के गांव मानपुर खुर्द निवासी मजदूर हुकम सिंह की पत्नी मीरा देवी का प्रसव अस्पताल में हुआ था, हुकम सिंह का आरोप है कि अस्पताल में उसकी पत्नी की डिलीवरी की गई. लेकिन डॉक्टरों ने डिलीवरी के बाद उसकी पत्नी को अलीगढ़ रेफर कर दिया गया. जिसके बाद वह अपनी पत्नी को लेकर अलीगढ़ पहुंचे तो डॉक्टरों ने बिना देखे ही अलीगढ़ से दिल्ली रेफर कर दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि राधे लाल अस्पताल के डॉक्टर की तरफ से डिलीवरी के दौरान लापरवाही बरती गई. डॉक्टरों की लापरवाही के चलते उसकी पत्नी मीरा की मौत हो गई. हालांकि डिलीवरी के दौरान उसकी पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया. बच्चा सुरक्षित है. लेकिन उसकी पत्नी की मौत हो गई।
केस-4 महुआखेड़ा थाना क्षेत्र के क्वार्सी बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में 45 वर्षीय संगीत पत्नी राजकुमार निवासी नौरंगाबाद छावनी, गांधी पार्क का रसौली का ऑपरेशन होना था। राजकुमार के मुताबिक मंगलवार सुबह उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि लापरवाही से ऑपरेशन किया गया। इसके चलते उनकी मौत हुई। मौत होने के बाद भी कई घंटे इस जानकारी को छुपाए रखा गया। शाम के वक्त शव सौंपते हुए मौत होने की बात स्टाफ द्वारा कही गई। इसका विरोध किया तो स्टाफ ने अभद्रता की। इसके बाद हंगामा किया गया तो स्टाफ भाग गया। इधर, सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को शांत कराया। इंस्पेक्टर महुआखेड़ा सुनील कुमार ने बताया कि मामले में तहरीर मिलने पर मुकदमा आदि की कार्रवाई की जाएगी।
केस-5 अनूपशहर की रहने वाली शीतल चौधरी की घटना
बुलंदशहर जिले के अनूप शहर क्षेत्र के राजोर की रहने वाली शीतल चौधरी ने बताया कि गांव शेखपुर निवासी बहनोई सुभाष सिंह (47) व भाई विपिन (43) को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, तभी 1 मई को सिकंदराबाद के नवीन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, 4 मई को तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो डॉक्टर ने वेंटिलेटर की व्यवस्था करने को कहा, बहनोई व भाई की कंडीशन देखकर पीड़िता घबरा गई और उसने अचानक वेंटिलेटर की व्यवस्था के लिए सोशल मीडिया पर एक वीडियो बनाकर डाली जिसमें एक परिचित लड़की हुमा खान जो अलीगढ़ के मेडिकल में अपने आप को नर्स बताती है ने पीड़िता से संपर्क किया और मदद करने का पूरा आश्वासन दिया, पीड़िता के अनुसार उसकी परिचित हुमा खान ने डॉ शाकिर के बारे में बताया और उनका नंबर साझा किया हुमा खान ने कहा कि यह आपके भाई व बहनोई के लिए वेंटिलेटर की व्यवस्था एवं अस्पताल की व्यवस्था कर देंगे.
परेशान पीड़िता ने डॉक्टर शाकिर से संपर्क साधा और फिर जो हुआ वह वह होश उड़ा देने वाली घटना साबित हुई, पीड़िता ने बताया कि वेंटिलेटर वाली एंबुलेंस का भरोसा देकर अलीगढ़ से एंबुलेंस भिजवाई गई जिसमें बहनोई को लेकर अलीगढ़ की और चलने वाले थे जिसके एवज में एंबुलेंस संचालक ने ₹50000 मांगे और बहनोई सुभाष सिंह को शिफ्ट करते समय ऑक्सीजन ना मिलने के कारण मौत हो गई, चालक ने मरीज के खाली सिलेंडर लगा दिया था जिसके कारण परिजनों ने मौत होने का आरोप लगाया.
पीड़िता ने आगे बताया कि भाई विपिन को लेकर वह दोपहर करीब 12:00 बजे इकरा कॉलोनी स्थित आई०एस०एच एफ्ति स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पहुंची जहां परिचित नर्स का भाई वहां मिला और डॉक्टर शाकिर भी वहां मौजूद था, जिसने अपने आप को अस्पताल का संचालक एवं डॉक्टर बताया।
पीड़िता शीतल चौधरी ने बताया कि डॉ शाकिर नामक व्यक्ति ने अस्पताल में वेंटिलेटर के नाम पर ₹50000 प्रतिदिन मांगे जिस पर ₹40000 प्रति दिन की बात तय हुई उसके अतिरिक्त डॉक्टर की विजीट, दवाइयां आदि के ₹20000 प्रतिदिन की बोला और कैश व्यवस्था करने की बोला, उसने ₹80000 एडवांस के तौर पर मांगे और कहा कि ₹25000 का ऑक्सीजन सिलेंडर लगेगा जो के दिन में 7-8 सिलेंडर लग सकते हैं और यह खर्चा अलग से होगा यह सब सुनकर पीड़िता हक्का-बक्का रह गई, पीड़िता ने इतने अधिक पैसे देने में असमर्थता व्यक्त की तो शाकिर पीड़िता को मेडिकल रोड स्थित दूसरे अस्पताल ले गया वहां भी पीड़िता से अधिक पैसे मांगे गए, पीड़िता समझ गई कि वह धंधे वालों के चंगुल में फंस चुकी है, पीड़िता ने बुलंदशहर की लक्ष्मी अस्पताल में बात की और साकिर से कहा कि हमें लक्ष्मी अस्पताल तक पहुंचा दीजिए फिर उसने ₹50000 एंबुलेंस के वह ₹5000 वेटिंग चार्ज मांगा, बात करने का समय नहीं था फिर हम लोग तैयार हो गए शाकिर हमारे साथ ही बुलंदशहर गया, पीड़िता ने कहा कि फिर देर हो चुकी की और उसका भाई विपिन इस दुनिया में नहीं रहा।
शीतल चौधरी द्वारा ट्विटर पर की गई शिकायत पर जिलाधिकारी ने ट्विट कर कहा कि "आपके द्वारा जो तथ्य बताए जा रहे हैं उसके संबंध में जिन लोगों ने आपके साथ ऐसा कृत्य किया है उनका नाम, पता और मोबाइल न. के साथ लिखित में शिकायत 09870666653 पर व्हाट्सप्प करें तथा 0571- 2420100, 2420101 व 2420102 पर सूचित करें। आपकी शिकायत पर जांचकर कार्यवाही की जाएगी"। शीतल चौधरी द्वारा अलीगढ़ आकर बयान भी दिए गए परंतु आज तक कोई भी कठोरतम कार्यवाही सामने नहीं आई जिसके कारण अवैध रूप से संचालन करने वाले लोगों एवं दलालों के इरादे बढ़ते गए और मरीज को जेब से लेकर मौत के घाट उतारने तक यह लोग पीछे नहीं हटते।
सौ ० Tv9bharat, Amarujala, Hindustan.
07/15/2022 07:01 AM


















