Aligarh
चतुर्थ सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत चतुर्थ दिवस आज संभागीय परिवहन कार्यालय, अलीगढ़ में फर्स्ट रेस्पान्डर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया:
अलीगढ़। प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 से बचाव व सड़क सुरक्षा तथा यातायात नियमों के प्रति जनमानस को जागरूक किये जाने के दृष्टिगत दिनांक-18.04.2022 से 24.04.2022 तक आयोजित चतुर्थ सड़क सुरक्षा सप्ताह के अन्तर्गत चतुर्थ दिवस आज दिनांक-21.04.2022 को संभागीय परिवहन कार्यालय, अलीगढ़ के सारथी भवन हॉल में सेव लाइफ फाउण्डेशन के सहयोग से बस/ट्रक/टैम्पो/ऑटो/ई-रिक्शा चालकों/परिचालकों को फर्स्ट रेस्पान्डर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रोडवेज के चालकों/परिचालकों सहित कुल 115 लोगों द्वारा प्रतिभाग किया गया। कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा से सम्बन्धित विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस कार्यक्रम में सेव लाइफ फाउण्डेशन द्वारा बताया गया कि दुर्घटना का प्रमुख कारण नींद और थकान है। नींद और थकान पर काबू पाने के लिये पर्याप्त सोना, पानी का सेवन करते रहना, विश्राम करना, यात्रा के दौरान पेटभर खाने के स्थान पर अल्पाहार लेना तथा व्यायाम करना शामिल है। दुर्घटना का दूसरा कारण वाहन का असुरिक्षत होना है, इसके लिये टायर का दबाव, ब्रेक पैड, इंजन ऑयल और कूलेन्ट, टायर की दशा आदि का ध्यान रखना जरूरी है। दुर्घटना की तीसरा कारण अन्य वाहन चालकों/रोड यूजर के व्यवहार को पहचानना है। इसलिये मुड़ने से पहले रियर व्यू मिरर के साथ-साथ अपने दायें और बायें भी देखना चाहिए, अचानक रोकना या मोड़ना नहीं चाहिए। दुर्घटना का चौथा कारण खराब सड़कें एवं मौसम है। धुन्ध, कोहरा, वर्षा, आँधी वाले मौसम में धीमी गति से गाड़ी चलानी चाहिए। अन्धे मोड़ पर हॉर्न बजाना चाहिये। दुर्घटना का पाँचवा कारण है नशा करके वाहन चलाना। एक पैग पीने से दुर्घटना की आशंका दो गुना बढ़ जाती है, 2 पैग पीने से दुर्घटना की आंशका तीन गुना और 4 पैग पीने से दुर्घटना की आशंका 7 गुना तक बढ़ जाती है। दुर्घटना का छठां कारण ओवरस्पीडिंग है। ओवरस्पीडिंग करने से वाहन को रोकने का रेस्पान्स टाइम कम हो जाता है, जिसके कारण वाहन अचानक रूक नहीं पाती और दुर्घटना घटित होती हैं।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि सड़क दुर्घटना में घायल होने वाले व्यक्ति के लिये दुर्घटना के बाद का 1 घंटे का समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यदि सड़क दुर्घटना के पश्चात् 1 घंटे के भीतर दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समुचित प्राथमिक चिकित्सा और उसके बाद अन्य चिकित्सीय सहायता मिल जाती है तो उसके जीवित बचने एवं ठीक होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है। दुर्घटना में पीड़ित व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा देने/अस्पताल पहुँचाने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन (नेक व्यक्ति) कहा जाता है। दुर्घटना पीड़ित की सहायता करने के बाद गुड सेमेरिटन को कोई समस्या न हो, इसके लिये मा0 उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर केद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय ने गुड सेमेरिटन के हितों के रक्षार्थ कानून भी बनाये हैं। इसके अन्तर्गत गुड सेमेरिटन से पुलिस या अस्पताल को अपनी पहचान बताने अथवा अपने बारे में जानकारी देने के लिये बाध्य नहीं किया जायेगा तथा उससे घायल के इलाज में होने वाले किसी भी व्यय की मांग नहीं की जायेगी। अस्तपाल चाहे राजकीय हो अथवा निजी, वहाँ के चिकित्सक को अविलम्ब घायल का इलाज प्रारम्भ करना होगा। साथ ही गुड सेमेरिटन को रू0 5000/- से पुरस्कृत किये जाने के बारे में भी बताया गया।
इस कार्यक्रम में श्री फरीदउद्दीन, संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), श्री रंजीत सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), श्री अमिताभ चतुर्वेदी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन), श्री चम्पा लाल, संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) एवं कार्यालय के कर्मचारी एवं लाईसेन्स हेतु आने वाले आवेदक उपस्थित रहे।
04/21/2022 06:30 PM


















