Aligarh
अलीगढ़ में एक निजी अस्पताल में भ्रूण लिंग जांच की जिलाधिकारी व सीएमओ से शिकायत, हुआ स्टिंग ऑपरेशन: करनाल में भ्रूण लिंग जांच के आरोपित दोषी करार।
अलीगढ़। भ्रूण लिंग की जांच करना भले ही सरकार ने एक संगीन अपराध माना हो | भले ही भ्रूण लिंग की जांच करने वाले के खिलाफ सख्त दंडात्मक कानून बनाए गए हो | और भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढाओ का नारा दे रहे हो और बेटा बेटी को एक समान मान रहे हो लेकिन कुछ व्यापारी जो डॉक्टर का सफेद कोट पहनकर इसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं।
ऐसा ही वाकया एक अलीगढ़ के रामघाट रोड स्थित निजी अस्पताल में किया जा रहा है जिसमें 10000 रूपये लेकर महिला का पूर्ण लिंग की जांच कर खुलेआम किया जा रहा है कानून का उल्लंघन, संचालक के हौसले इतने बुलंद हैं कि ऐसे अपराध को खुलेआम किया जा रहा हैं ये काम या तो राजनीतिक कुर्सी पर बैठकर किसी की आढ में हो रहा है या फिर लोभ लालच के कारण ये जाँच का विषय है | खुलेआम कर रहे अपराध को अस्पताल संचालक ने अस्पताल के बाहर पूर्ण लिंग की जांच का नोटिस बोर्ड भी नहीं लगाया महिला का फॉर्म एफ भरकर 10000 रूपये लेकर लड़का बताया जिसकी वीडियो स्टिंग के जरिए बनाई गई, समाजसेवी ने अस्पताल के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग जिलाधिकारी एवं सीएमओ से की है।
आपको बता दें कि "प्रे न्यू नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निकल एक्ट" PCPNDT ACT व प्रीवेंशन ऑफ सेक्स इलेक्शन एक्ट के तहत अस्पताल में हो भ्रुण लिंग परीक्षण का नोटिस लगाया जाना आवश्यक है, मशीन का पंजीकरण प्रमाण पत्र चिकित्सक एवं स्टाफ का नाम और उसकी क्वालिफिकेशन नोटिस पर लगाना आवश्यक है उसके साथ ही पीसीपीएनडीटी एक्ट की किताब भी जनता के सामने रखना आवश्यक है, एवं फॉर्म एफ को भरना भी आवश्यक है, भ्रूण जाँच करने वाले के विरुद्ध 3 साल की जेल एवं जुर्माना और अस्पताल एवं डॉक्टर का लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है राज्य सरकार की 2017 मोहित योजना के तहत कोई भी व्यक्ति ऐसे अस्पताल पर जहां भ्रूण जाँच होती है उस पर छापामार कार्यवाही करवा सकता है, जिसमें राज्य सरकार 3 लोगों को भुगतान भी करती है।
करनाल में भ्रूण लिंग जांच के आरोपित दोषी करार, एक साल का कठोर कारावास
करनाल में भ्रूण लिंग जांच मामले में आरोपित लंबे अंतराल के बाद सजा के हकदार बने हैं। जिले के असंध ब्लाक में दो अलग-अलग मामलों में सात आरोपितों को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए कठोर कारावास के साथ 1000-1000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
डिस्ट्रिक अटार्नी करनाल डा. पंकज ने बताया कि पहले मामले में सात मई 2016 को स्वास्थ्य विभाग जींद की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि करनाल के असंध में भ्रूण लिंग जांच कराई जाती है। इस काम में कई लोग शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले में संलिप्त दीपक कुमार वासी उरलाना कलां असंध, प्रेम सिंह व अशोक कुमार वासी काबुलपुर खेड़ा और गुरजन्त सिंह को पकड़ा था।
9-9 महीने का कठोर कारावास
स्वास्थ्य विभाग द्वारा थाना असंध में शिकायत दी गई जिस पर मुकदमा दर्ज हुआ था। मामला असंध कोर्ट में विचाराधीन था। असंध कोर्ट के जेआइएमसी सुनील कुमार ने आईपीसी व पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में आरोपितों को दोषी करार देते हुए नौ-नौ महीने की कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 1000-1000 जुर्माना लगाया है।
एक-एक साल का कठोर कारावास
वहीं दूसरे मामले में 14 अप्रैल 2016 को स्वास्थ्य विभाग करनाल की टीम को सूचना मिली कि असंध में कुछ लोग भ्रूण लिंग जांच करते हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने टीम गठित कर संदीप, गुरप्रीत उर्फ कमल व गुरजन्त सिंह को गिरफ्तार कराया था। थाना असंध में मुकदमा दर्ज किया गया। असंध कोर्ट के जेएमआइसी सुनील कुमार ने 15 मार्च को विभिन्न धाराओं में दोषियों को एक-एक साल की कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए 1000-1000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
मुखबिर योजना:भ्रूण लिंग परीक्षण की सूचना देने पर 3 लाख का पुरस्कार
पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण कानूनन अपराध है। पीसीपीएनडीटी अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में मुखबिर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. कुणाल साहू ने बताया कि भ्रूण लिंग जांच करने वाले केंद्रों या व्यक्तियों की सही जानकारी देने पर मुखबिर योजना के अंतर्गत कुल 3 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
उन्होंने बताया कि मुखबिर योजना के तहत भ्रूण लिंग परीक्षण संबंधी सूचना ईमेल pcpndt.bureau@gmail.com व टोल फ्री नंबर 104 व 108 तथा वाॅटसअप नंबर 9799997795 पर भी दी जा सकती है। मुखबिर की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
डाॅ. साहू ने बताया कि मुखबिर योजना का उद्देश्य समाज में घटते बाल लिंगानुपात पर रोक लगाने का प्रयास करना, तकनीक का दुरुपयोग कर भ्रूण का लिंग परीक्षण कर बेटियों को जन्म लेने से रोकने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करना, समाज को बेटी बचाने के लिए जागरुक करना व गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक के दुरुपयोग को रोकना है।
उन्होंने बताया कि जिले में कार्यरत समस्त चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम, पैरामेडिकल स्टाॅफ एवं आशा सहयोगिनियों द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में मुखबिर योजना एवं बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम का व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
03/16/2022 03:42 AM


















