Aligarh
अलीगढ़ के शमशाद मार्केट पर निकाला गया ताजिया जुलूस महापौर रहे शामिल: पारंपरिक तरीके से शांतिपूर्वक मनाया गया मोहर्रम।
अलीगढ़। विश्व के साथ-साथ भारत में भी कोविड-19 ने अपने पैर पसार लिए थे जिसके कारण वश बहुत से लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई थी, बहुत से परिवारों ने अपनों को खो दिया था और भारत सरकार ने देशभर में लॉकडाउन लगा दिया गया था जैसे-जैसे कोरोना का वायरस कम होता गया वैसे वैसे ही राज्य स्तर से लॉकडाउन में ढील दे दी गई और अब समय ऐसा आ गया कि कोरोना वायरस लगभग खत्म सा हो गया है कोरोनावायरस के समय से ही कारोबार से लेकर त्योहारों तक पर असर पड़ा और कारोबार फीके पड़ गए और तोहार भी फीके पड़ गए थे।
2019 से 2022 आते-आते कोरोना धीरे-धीरे खत्म सा हुआ और कारोबार ने भी गति पकड़ी और त्यौहार भी धूमधाम से मनाए जाने लगे वरना आलम यह हो गया था कि होली, दीपावली, ईद लोगों ने घर पर ही मनाई।
कोरोना काल के 3 वर्षों बाद आज अलीगढ़ में इमाम हुसैन उनके 72 साथियों की शहादत पर मनाया जाने वाला मोहर्रम का पर्व ताजिया का जुलूस अपने घरों से मुख्य मार्गों पर होते हुए कर्बला मैदान तक निकाला गया जिसमें ताजिया को खड़ा करते हैं जिससे ताजियों को उठाने वाले लोग उनके घर से एक एक करके एक मुख्य मार्ग पर इकट्ठा होकर कर्बला की तरफ लेकर जाते हैं और उसके बाद ताजिया को कर्बला में जाकर दफन कर दिया जाता है ।
अलीगढ़ शहर में एवं कुछ कस्बों में ताजिए निकाले जाते हैं आज भी ताजिए जगह-जगह निकाले गए प्रमुख रूप से शमशाद मार्केट, जीवनगढ़, शाह जमाल आदि क्षेत्र में ताजिए निकाले गए, शमशाद मार्केट पर महापौर मोहम्मद फुरकान जुलूस में शामिल हुए और आपको बता दें कि हजरत इमाम हुसैन की याद में शिया समुदाय ने आज अलीगढ़ में मातमी जुलूस निकाला जुलूस में बच्चे और बड़े काले कपड़े पहनकर शामिल हुए, अलम और ताजिए के जुलूस में बड़ों ने छड़ी भी निकाली, इमामबाड़ा से शुरू हुआ मातमी जुलूस कर्बला पर जाकर संपन्न हुआ उसके बाद भूखे, प्यासे आदि लोगों का रोजा (फाका) खत्म कराया गया, कर्बला में ताजिया दफन किया गया इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से जिले भर में सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद रही ।
08/09/2022 03:11 PM